बिहार में पंचायत चुनाव: परिसीमन के बाद बदलेगी पूरी तस्वीर !
राज्य सरकार की तरफ से बिहार में पंचायती पंचायत चुनाव के पहले परिसीमन की स्वीकृति दिए जाने के बाद से अब राज्य में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंचायत चुनाव में राज्य के ग्रामीण हिस्सों की राजनीति का चेहरा बदल जाएगा? क्या अब तक के जो ग्रामीण समीकरण थे, वह सभी बदल जाएंगे?
दरअसल सम्राट कैबिनेट में चंद रोज पहले ही इस बात पर अपने मुहर लगा रही थी कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायत पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्र का पुनर्गठन करेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य आबादी के अनुसार संतुलित प्रतिनिधित्व देने का है। वर्तमान में राज्य में 841 ग्राम पंचायत हैं और एहसान अंदाजा है कि परिसीमन हो जाने के बाद इनकी संख्या में वृद्धि होगी और यह लगभग 12500 हजार के करीब हो जाएंगे। यानी वर्तमान पंचायत की संख्या के हिसाब से मुखिया और सरपंच के पदों में लगभग 55% की वृद्धि हो सकती है। वहीं अगर वार्ड की बात करें तो वर्तमान में 1,9,310 वार्ड है परिसीमन के बाद इनकी संख्या 1.76 लाख होने की उम्मीद है जबकि पंचायत समिति सदस्य की संख्या 1,1070 से बढ़कर 17600 और जिला पार्षदों की संख्या 1160 से बढ़कर 1760 होने की उम्मीद है।
परिसीमन के बाद न केवल संख्या में बदलाव होने की उम्मीद है बल्कि राज सरकार के द्वारा मानदेय पर होने वाले खर्च में भी बड़ी वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में राज्य सरकार की तरफ से जनप्रतिनिधियों के मानदेय पर सालाना लगभग 330 करोड रूपये का खर्च होता है। ऐसी उम्मीद है कि परिसीमन के बाद यह संख्या 550 करोड़ रूपये तक पहुंच सकती है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। खास बात यह कि यह राशि राज्य वित्त आयोग के अनुदान से दी जाती है।
हालांकि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने परिसीमन करने का फैसला लिया है। आरक्षण रोस्टर में भी बदलाव होगा। क्योंकि हर 10 साल में संशोधन करना अनिवार्य है। अब निर्वाचन आयोग परिसीमन और नई आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप देगा। इसके बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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