ऊर्जा क्षेत्र में बदलता राज्य, अलग-अलग हिस्सों में बनेगा मेगा ग्रिड सब स्टेशन
बिहार अब शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ऊर्जा क्षेत्र भी तेजी से हाईटेक होता जा रहा है। प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लिए तत्परता से काम कर रही डबल इंजन की सरकार ने बिहार के अलग-अलग हिस्सों में 20 नये ग्रिड सब स्टेशन बनाने का निर्णय लिया है। विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के दस शहर व प्रखंड में 20 नये सब स्टेशन का निर्माण किया जायेगा। ताकि शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी क्वालिटी बिजली को सुचारू रूप से आपूर्ति किया जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना को पूरा करने के लिए 11 हजार करोड़ की लागत खर्च की जायेगी। साथ ही सभी ग्रिड सब स्टेशनों को जीआईएस तकनीक से लैस बनाया जायेगा। इसपर अधिकारियों ने कहा कि नये ग्रिड के निर्माण होने से राज्य में बिजली आपूर्ति खपत से दोगुनी हो जायेगी।
बता दें कि वर्तमान में राज्य में ग्रिड की संख्या 175 है। वहीं वर्ष 2029-30 तक 20 ग्रिड सब स्टेशन के निर्माण होने से संख्या 195 हो जायेगी। जिससे राज्य में लगभग 14 करोड़ बिहारवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति की जायेगी। वहीं इसके निर्माण के लिए नयी तकनीक जीआइएस का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत राज्य के छपरा स्थित कटासा, सीवान स्थित मैरवा, बेगूसराय, झंझारपुर व दरभंगा, केरपा के रोहतास में 400 केवी ग्रिड उपकेंद्र का निर्माण, बैरिया, मीठापुर, कंकडबाग, मनेर में 200 केवी का ग्रिड उपकेंद्र का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा कुमारबाग, नवांनगर, बरारी, व भवानीपुर, कोढा में ग्रिड उपकेंद्र का बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
आंकड़ों की मानें तो राज्य में बीते दो दशक में बिजली की खपत दस गुना से भी अधिक हो गयी है। साल 2005 में राज्य में बिजली की खपत की करीब 700 मेगावाट दर्ज की गयी थी। जो वर्तमान में बढकर 9426 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। वहीं बिहार में मुख्यमंत्री श्री चौधरी की सरकार में इस बिना रूकावट बिजली आपूर्ति को पूरा किया जा गया है। साथ ही इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 125 युनिट बिजली मुफ्त में उपलब्ध कर मध्यम व निम्न वर्गीय उपभोक्ता को बड़ा राहत प्रदान किया है।
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