संघर्ष की दुकान से सफलता की उड़ान, एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों ने NEET-UG पास कर रचा इतिहास
राज्य के सहरसा जिले से मनोबल को बढाने वाली खबर है। यहां एक ही परिवार के तीन भाई बहनों ने एक साथ नीट यूजी को क्लियर करने में सफलता हासिल की है। परीक्षा का परिणाम सामने आने के बाद परिवार के साथ पूरे इलाके में हर्ष का माहौल है। वहीं परिवार को लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
मिली जानकारी के अनुसार सहरसा जिले के बिहरा थाना क्षेत्र स्थित तुलसियाही गांव से मेहनत, संघर्ष और सफलता की ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है। जिसने पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया है। गांव के एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) उत्तीर्ण कर चिकित्सा शिक्षा की दिशा में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि तीनों भाई-बहन बेहद साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता एक छोटी-सी किराना दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां पूनम देवी गृहिणी हैं।
प्राप्त खबर के अनुसार इन तीनों के पिता रोहित कुमार एक किराना का दुकान चलाते हैं। इनकी तीन संतान रजनीश कुमार ने 3122, बेटी साक्षी कुमारी ने 9672 और सबसे छोटे प्रह्लाद कुमार ने 2675 रैंक को हासिल किया है। अब यह डॉक्टर बनने की दिशा में अपने कदम को आगे बढाएंगे। रजनीश ने अपने दसवीं की पढाई सीबीएसइ बोर्ड से किया है जबकि 12वीं की स्टडी एसएनएस कॉलेज से पूरा किया है। वहीं साक्षी ने दसवीं और 12वीं की स्टडी बिहार बोर्ड से पूरा किया है जबकि प्रह्लाद ने दसवीं की स्टडी जीवनदीप स्कूल तथा 12वीं की स्टडी सीहौल हाई स्कूल से पूरी की है। परिजनों के अनुसार तीनों ही भाई बहन 10 से 12 घंटा नियमित रूप से पढ़ाई करते थे। उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य चीजों से अपनी दूरी को बनाकर के रखा हुआ था। इनका लक्ष्य केवल सफलता थी। तैयारी के दौरान तीनों पुराने पेपर प्रश्न पत्र का अभ्यास करते थे।
परिजनों का कहना था कि सीमित आय और संसाधनों के बावजूद कभी भी बच्चों की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। उन्होंने हर परिस्थिति में शिक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया। माता-पिता के इसी विश्वास और त्याग का परिणाम है कि बच्चों ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर NEET-UG जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर परिवार के साथ-साथ पूरे सहरसा जिले का नाम रोशन कर दिया। यह सफलता केवल एक परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों साधारण परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। तुलसियाही गांव के इन तीन भाई-बहनों ने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का साथ मिले, तो आर्थिक कठिनाइयां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। अब इन तीनों की सफलता पर परिजनों के साथ रिश्तेदारों और स्थानीय लोग में हर्ष है। हर तरफ से इन्हें बधाई मिल रही है।
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