नीतीश के हिजाब खींचने पर बोले तेजप्रताप, इस तरीके का काम उनको नहीं करना चाहिए था

पटना में आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला चिकित्सक का हिजाब हटाने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलको

नीतीश के हिजाब खींचने पर बोले तेजप्रताप, इस तरीके का काम उनको नहीं करना चाहिए था
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Dec 22, 2025, 11:28:00 AM

पटना में आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला चिकित्सक का हिजाब हटाने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अब इस मुद्दे पर जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

तेजप्रताप यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने क्या किया और क्या नहीं किया, यह उनका निजी मामला है और मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। लेकिन जिस तरह से उन्होंने एक महिला का हिजाब खींचा, वैसा नहीं करना चाहिए था। इस तरह का काम उन्हें नहीं करना चाहिए था।” तेजप्रताप यादव ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार का व्यवहार किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

दरअसल, यह मामला हाल ही में पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां एक हजार से अधिक नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपे जा रहे थे। इसी दौरान नुसरत परवीन नामक महिला चिकित्सक, जो हिजाब में थीं, जब मंच पर पहुंचीं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यह क्या है?” और इसके बाद कथित तौर पर उनके चेहरे से हिजाब हटा दिया।

वीडियो में यह भी देखा गया कि महिला चिकित्सक इस स्थिति में असहज और घबराई हुई नजर आईं, जिसके बाद वहां मौजूद एक अधिकारी ने उन्हें तुरंत एक ओर कर दिया। वहीं मुख्यमंत्री के बगल में खड़े उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए उनकी आस्तीन पकड़ते नजर आए।

इस घटना के सामने आने के बाद कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नेताओं ने इसे महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।