स्टेडियम निर्माण पर जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने अपनी ही सरकार को घेरा, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह को देना पड़ा जवाब

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान उस वक्त दिलचस्प स्थिति देखने को मिली, जब सत्ताधारी जेडीयू की ही विधायक ने अपनी सरकार से तीखे सवाल पूछ लिए।

स्टेडियम निर्माण पर जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने अपनी ही सरकार को घेरा, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह को देना पड़ा जवाब
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Feb 03, 2026, 1:17:00 PM

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान उस वक्त दिलचस्प स्थिति देखने को मिली, जब सत्ताधारी जेडीयू की ही विधायक ने अपनी सरकार से तीखे सवाल पूछ लिए। प्रश्नोत्तरकाल के दौरान मुजफ्फरपुर के गायघाट से जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने अपने क्षेत्र में स्टेडियम निर्माण को लेकर सरकार को घेरा।

कोमल सिंह ने खेल विभाग से पूछा कि गायघाट विधानसभा क्षेत्र के जारंग और अथवारा पंचायत में जिन स्टेडियमों के निर्माण की बात सरकार कर रही है, वह वास्तव में कहां हैं और उनकी स्थिति क्या है। विभाग की ओर से दिए गए जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं दिखीं और उन्होंने सदन में पूरक सवाल दागते हुए कहा कि जो जानकारी उन्हें दी गई है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।

विधायक कोमल सिंह ने कहा कि जिन स्टेडियमों का जिक्र किया जा रहा है, वह दरअसल स्कूल का सामान्य खेल मैदान है, जहां न तो खेल से जुड़ी कोई बुनियादी सुविधा है और न ही खिलाड़ियों के लिए कोई व्यवस्था। उन्होंने साफ कहा कि वहां न दर्शक दीर्घा है, न चेंजिंग रूम और न ही किसी तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसे स्टेडियम कहा जा सके।

कोमल सिंह ने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और गायघाट क्षेत्र में सही मायने में स्टेडियम का निर्माण कराया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं और खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके।

वहीं, सरकार की ओर से खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने विधायक के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि संबंधित स्थान पर फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण किया गया है। मंत्री ने बताया कि निर्माण कार्य की जीओ-टैगिंग की गई है और वहां की तस्वीरें भी विभाग के पास उपलब्ध हैं।

श्रेयसी सिंह ने यह भी कहा कि यदि विधायक चाहें तो उन्हें स्थल का दौरा कराया जा सकता है और उनके सुझावों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

इस तरह सदन में सत्ताधारी दल की विधायक और मंत्री के बीच हुई यह बहस स्थानीय विकास और जमीनी सच्चाई को लेकर अहम मानी जा रही है।