मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा आज समस्तीपुर पहुंची, जहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपनी सरकार के कामकाज और उपलब्धियों का विस्तार से जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के आने से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी। पढ़ाई की हालत बदतर थी, सड़कें और बिजली नहीं थीं, स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई थी और समाज में डर का माहौल बना रहता था। हिंदू-मुस्लिम झगड़े आम बात थे, लेकिन उस समय की सरकारें इन्हें रोकने में नाकाम रहीं।
नीतीश कुमार ने कहा कि जब उनकी सरकार बनी, तब विकास को प्राथमिकता दी गई और कानून का राज स्थापित किया गया। सामाजिक तनाव को खत्म करने के लिए कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई गई, जिससे सांप्रदायिक झगड़ों पर प्रभावी रोक लगी। आज राज्य में शांति का माहौल है और लोग बिना डर के अपना जीवन जी रहे हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने समस्तीपुर के सरायगंज में 827 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इसके बाद वे राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचे, जहां करीब 25 स्टॉलों का निरीक्षण किया और छात्रों से संवाद भी किया। कॉलेज परिसर में 1 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से बने इम्यूनिटी भवन का उद्घाटन किया गया। साथ ही इंजीनियरिंग छात्रों के लिए तैयार की गई वर्कशॉप, क्लासरूम और उनके द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स का भी जायजा लिया गया।
मुख्यमंत्री ने बिजली व्यवस्था पर बात करते हुए कहा कि पहले बिहार में बिजली का नामोनिशान नहीं था। उनकी सरकार ने निवेश कर 2018 में हर घर बिजली पहुंचाई। पहले सस्ती दरों पर बिजली दी गई और अब घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मिल रही है। साथ ही छतों पर सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
महिलाओं के सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार ने बताया कि 2013 में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण दिया गया और 2016 में इसे और मजबूत किया गया। स्वयं सहायता समूहों की संख्या बढ़ाने के लिए 2006 में विश्व बैंक से कर्ज लेकर “जीविका दीदी” योजना शुरू की गई। आज ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या 1 करोड़ 40 लाख तक पहुंच चुकी है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 4 लाख 34 हजार जीविका दीदियां सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सच्चा विकास और सामाजिक बदलाव की मिसाल है।