राजद से दूरी बनाकर कांग्रेस करेगी मनरेगा आंदोलन, 8 जनवरी से सड़कों पर उतरने की तैयारी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजद और कांग्रेस के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही है। गठबंधन को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बयान से हलचल मचा हुआ है।

राजद से दूरी बनाकर कांग्रेस करेगी मनरेगा आंदोलन, 8 जनवरी से सड़कों पर उतरने की तैयारी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 06, 2026, 12:55:00 PM

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजद और कांग्रेस के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही है। गठबंधन को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बयान से हलचल मचा हुआ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने साफ कहा कि राजद के साथ गठबंधन सिर्फ चुनाव तक सीमित है। वहीं कांग्रेस नेता शकील अहमद ने भी गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि न तो कांग्रेस को कोई चुनावी फायदा मिल रहा है और न ही गठबंधन मजबूत हो पा रहा है। इन बयानों के बाद राजद और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब मनरेगा वापसी की मांग को लेकर 8 जनवरी से शुरू हो रहे राज्यव्यापी आंदोलन में भी कांग्रेस राजद को छोड़कर सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुकी है। यहां तक कि कांग्रेस यूपीए के बाकी घटक दलों भाकपा, माकपा, भाकपा माले और वीआईपी को भी मनरेगा आंदोलन में साथ नहीं लेने जा रही है। जबकि इसके विपरीत पड़ोसी राज्य झारखंड में कांग्रेस के साथ सत्ताधारी गठबंधन में साझेदारी से सरकार चला रहा झामुमो भी मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी करने और उसके बदले प्रावधानों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहा है।

राजद, भाकपा, माकपा और माले की ओर से यूपीए गठबंधन से इतर केवल अपने बैनर तले भी मनरेगा के कथित महत्वपूर्ण प्रावधानों को हटाने के खिलाफ आंदोलन की कोई घोषणा नहीं की गई है। 

मनरेगा आंदोलन में कांग्रेस के 'एकला चलो' की राह बढ़ने से यह तय हो गया है कि प्रदेश में महागठबंधन के खत्म होने की केवल औपचारिक घोषणा मात्र बची रह गई है। हाल के दिनों में यूपीए के घटक दलों के साझा मंच से किसी राजनीतिक कार्यक्रम की दूर-दूर तक संभावना नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे शकील अहमद खां भी राजद के साथ गठबंधन को कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा बता चुके हैं। राजद की ओर से भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई थी। अब केवल राजद और कांग्रेस ही नहीं यूपीए के बाकी घटक दलों का नेतृत्व भी अकेले चलने का मन बना चुका है।