बिहार की राजनीति की आंच अब दिल्ली तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में बड़ी सेंधमारी की है। दिल्ली में आयोजित एक मिलन समारोह में लोजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक और स्वर्गीय रामविलास पासवान के बेहद करीबी रहे ए.के. बाजपेयी ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ उपेंद्र कुशवाहा का नेतृत्व स्वीकार कर लिया है
उपेन्द्र कुशवाहा ने दिल्ली में कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन सभी को अपनी पार्टी की सदस्यता दिलाई. उपेन्द्र कुशवाहा ने आरएलएम ज्वाइन करने वाले सभी नेताओं का स्वागत किया और उन्हें बधाई दी. उन्होंने कहा कि ए के वाजपेई आरएलएम ज्वाइन करने वाले सभी नेताओं के दल में आने से पार्टी को फायदा होगा. कुशवाहा ने कहा कि ए के वाजपेई की क्षमता सबने देखी है और अब इनकी क्षमता का लाभ हमारी पार्टी को मिलेगा.
उपेंद्र कुशवाहा की उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में ए.के. बाजपेयी ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा की सदस्यता ग्रहण की। वे लोजपा के राष्ट्रीय वरिष्ठ अध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके जाने से पार्टी के पुराने कैडर में खलबली मच गई है। बाजपेयी के साथ-साथ लोजपा की संपूर्ण जम्मू-कश्मीर इकाई और लगभग 50 वरिष्ठ नेताओं ने भी चिराग का साथ छोड़ दिया है, जो संगठन के लिए बड़ी क्षति मानी जा रही है।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ए के वाजपेई हमारे पास आए. अगर एनडीए में नहीं आते तो एनडीए का नुकसान होता. घी गिरा है तो दाल में ही गिरा है. चिराग पासवान की पार्टी छोड़ने के बाद ए के वाजपेई के आरएलएम में शामिल होने को उपेन्द्र कुशवाहा ने जायज ठहराया है.
ए के वाजपेई ने कहा कि चिराग पासवान की क्षमता में हमें कमी दिखी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मान सम्मान में ठेस लगी इसलिए उन्होंने एलजेपी को छोड़ा है. ए के वाजपेई ने कहा "हम अपने घर में वापस आए हैं, हमें मान सम्मान को ठेस लगी तो हम निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं."
इस 'बगावत' को चिराग पासवान के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ए.के. बाजपेयी न केवल वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, बल्कि 1985 से पासवान परिवार के विश्वस्त सहयोगी रहे हैं।