पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के साथ रेप-मौत मामले में स्वराज पोस्ट की खबर का बड़ा असर हुआ है। पुलिस ने चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
अधिकारियों ने ये माना है कि केस में निचले स्तर पर लापरवाही बरती गई है, जिसके बाद देर रात यह कार्रवाई हुई है।
आरोप है कि घटना के पहले दिन से ही चित्रगुप्त नगर SHO को पूरी जानकारी थी, लेकिन वो इसे इग्नोर करती रही। यहां तक कि 3 दिन के बाद कार्रवाई शुरू की और वरीय अधिकारियों को भी मिस लीड किया। जिससे इन्वेस्टिगेशन में काफी परेशानी हुई।
इधर, फॉरेंसिंक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की बात कही गई है। फॉरेंसिंक रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि हो रही है।
6 जनवरी को NEET की तैयारी कर रही छात्रा शंभू हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी। हॉस्टल के कर्मचारी उसे हॉस्पिटल ले जाते हैं। एक हॉस्पिटल, दो हॉस्पिटल और फिर तीसरे हॉस्पिटल में मौत। छह जनवरी से नौ जनवरी तक चले इस घटनाक्रम में पुलिस सीन से गायब है।
तीन दिन तक न हॉस्टल सील हुआ, न कमरा, न बिस्तर, न कपड़े। कानून के जानकारों के अनुसार यही सबसे महत्वपूर्ण समय था, जिसमें सबूत इकट्ठे किए जाते, लेकिन पुलिस सबसे सुस्त रही। थाना प्रभारी रौशनी कुमारी ने एक कहानी गढ़ी कि लड़की ने सुसाइड किया है। उसी कहानी को एएसपी, एसपी और खुद एसएसपी भी आगे बढ़ाते रहे।
स्वराज पोस्ट की पड़ताल में यह सामने आया था कि यह किसी एक अफसर की गलती नहीं है। बिहार के इस संवेदनशील मामले में 5 चेहरे जिनकी लापरवाही सामने आई है। जिसमें थाना प्रभारी ने गलत रिपोर्ट दी, एएसपी, एसपी ने उसे सुसाइड बता दिया और एसएसपी ने तो रेप से ही इनकार कर दिया।