IRCTC टेंडर मामले में राबड़ी देवी की ट्रांसफर याचिका पर हुई सुनवाई, CBI ने किया विरोध

IRCTC टेंडर और अन्य कथित घोटाला मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के केस की ट्रांसफर अर्जी पर शनिवार को सुनवाई हुई. यह सुनवाई दिल्ली की राउज एवन्यू कोर्ट में हुई.

IRCTC टेंडर मामले में राबड़ी देवी की ट्रांसफर याचिका पर हुई सुनवाई, CBI ने किया विरोध
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Dec 13, 2025, 8:17:00 PM

IRCTC टेंडर और अन्य कथित घोटाला मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के केस की ट्रांसफर अर्जी पर शनिवार को सुनवाई हुई. यह सुनवाई दिल्ली की राउज एवन्यू कोर्ट में हुई. वहीं, सीबीआई ने राबड़ी देवी के केस की ट्रांसफर अर्जी का विरोध किया. सीबीआई ने स्पेशल जज विशाल गोगने को मामले से ट्रांसफर करने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि कोई भी आरोपी अदालत पर दबाव नहीं डाल सकता है या न्यायाधीश को बदनाम नहीं कर सकता

राबड़ी देवी ने अपनी ट्रांसफर अर्जी में सभी 5 मामलों से मौजूद जज विशाल गोगेने को बदलने की मांग की है. CBI की ओर से पेश SPP DP सिंह ने कोर्ट में कहा कि राबड़ी देवी ने न्यायपालिका पर लांछन लगाया है. स्पेशल जज विशाल गोगने प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं

राबड़ी देवी ने अपनी ट्रांसफर अर्जी में सभी 5 मामलों से मौजूद जज विशाल गोगेने को बदलने की मांग की है. CBI की ओर से पेश SPP DP सिंह ने कोर्ट में कहा कि राबड़ी देवी ने न्यायपालिका पर लांछन लगाया है. स्पेशल जज विशाल गोगने प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं

राबड़ी देवी ने IRCTC होटल करप्शन केस और स्पेशल कोर्ट में पेंडिंग जमीन के बदले नौकरी करप्शन केस से जुड़े मामलों को ट्रांसफर करने के लिए चार अर्जी दी हैं.

इससे पहले 6 दिसंबर को, राबड़ी देवी की ओर से सीनियर एडवोकेट ने कहा था कि बिहार के पूर्व CM को केस की सुनवाई कर रही कोर्ट पर कोई भरोसा नहीं है. जिस तरह से कार्रवाई की गई, उससे भेदभाव दिखता है. उन्होंने कहा था कि भेदभाव करने वालों ने देखा, महसूस किया और झेला. भेदभाव जानबूझकर किया गया है.

एडवोकेट ने कहा था कि हम यहां आरोप के खिलाफ नहीं हैं, हम इसे हाई कोर्ट में चुनौती देंगे. हाई कोर्ट ने पहले एक आदेश दिया था कि मंजूरी के बिंदु पर आरोपी व्यक्तियों को सुने बिना आरोप पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाएगा. मंजूरी न होने के कारण संज्ञान नहीं लिया जा सका.

सीनियर एडवोकेट ने तर्क दिया था, “हमने एक आवेदन दिया था कि कोर्ट को संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है, और उसे लंबित रखा गया. और आवेदक और अन्य के खिलाफ आरोप तय किए गए.” उन्होंने आगे कहा, “मेरी (राबड़ी देवी) जिंदगी का फैसला किसी जज के किसी खास नजरिए से नहीं किया जा सकता.” सीनियर वकील ने कहा था कि जज का यह फर्ज था कि वह राबड़ी देवी के अधिकार में कटौती न करे. उन्होंने कहा, “मेरी अर्जी को पेंडिंग रखकर राबड़ी देवी के अधिकार में कटौती की गई.