सरकारी स्कूलों के प्रिसिंपल और टीचर अब रसोइयों से नहीं करा सकेंगे एक्स्ट्रा काम, बिहार के शिक्षा विभाग का नया नियम

बिहार के सरकारी स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन योजना में रसोईयों से कई अन्य काम लिए जाने और शिक्षकों द्वारा उनके साथ सही तरीके से पेश न आने के कई मामले सामने आते रहे हैं

सरकारी स्कूलों के प्रिसिंपल और टीचर अब रसोइयों से नहीं करा सकेंगे एक्स्ट्रा काम, बिहार के शिक्षा विभाग का नया नियम
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 23, 2026, 2:06:00 PM

बिहार के सरकारी स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन योजना में रसोईयों से कई अन्य काम लिए जाने और शिक्षकों द्वारा उनके साथ सही तरीके से पेश न आने के कई मामले सामने आते रहे हैं. अब बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के निदेशालय ने रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त कार्य कराने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त आदेश जारी किया है. निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में कार्यरत रसोईया-सह-सहायक से मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े कार्यों के अलावा कोई अन्य काम लेना नियमों के विरुद्ध है और ऐसा करने पर संबंधित पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है.

मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र (भा.प्र.से.) द्वारा संचिका संख्या म.भो. को-ES-57/2012 अंश-235 के तहत सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी निदेशालय द्वारा पत्रांक 501, दिनांक 19 मार्च 2018 के माध्यम से स्पष्ट आदेश दिया जा चुका है कि रसोईया-सह-सहायक से केवल भोजन बनाने, बच्चों को भोजन परोसने और बर्तनों की साफ-सफाई जैसे कार्य ही लिए जाएं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

फिर भी बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना रसोईया संघ के माध्यम से यह शिकायत प्राप्त हुई कि कई विद्यालयों में रसोईया-सह-सहायक से विद्यालय परिसर की सफाई, कमरों में झाड़ू लगवाने और शौचालय की साफ-सफाई जैसे अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार भी नहीं किया जा रहा है, जो नियमों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के भी विरुद्ध है

निदेशालय का मानना है कि रसोईया-सह-सहायक विद्यालय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनकी भूमिका बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित है. उनसे अन्य कार्य कराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनकी कार्य-दक्षता और मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है.

इस आदेश के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि यदि किसी विद्यालय में रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त कार्य कराया गया, तो संबंधित प्रधानाध्यापक या पदाधिकारी पर कार्रवाई तय मानी जाएगी. यानी अब रसोईया से अन्य काम कराना प्रशासनिक रूप से “महंगा” साबित हो सकता है.