बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर 1 अप्रैल से बोझ बढ़ सकता है। राज्य की दोनों बिजली कंपनियों (साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन) ने बिहार विद्युत विनियामक आयोग को टैरिफ प्रस्ताव भेजकर दरों में बढ़ोतरी के संकेत दिए 3200 करोड़ रुपये का बकाया है। हैं। इस संभावित बढ़ोतरी का मुख्य कारण बिजली बोर्ड के जमाने का
बिजली कंपनी मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2012 में बिजली बोर्ड से कंपनी के गठन के दौरान एसेट-लायबिलिटि के नाम पर 1100 करोड़ देना था। इसके अलावे अन्य बकाया मिलाकर 3200 करोड़ है। इस पैसा को लेने के लिए एप्टेल (विद्युत अपीलीय न्याधिकरण) ने
भुगतान नहीं करती है तो दर में बढ़ोतरी करनी होगी। आयोग ने जनसुनवाई पूरी कर ली है। फैसला अप्रैल में सुनाएगी। नई दर 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा।