NEET छात्रा रेप-मौत मामले में अब CBI की एंट्री हो चुकी है। गुरुवार को केंद्रीय जांच एजेंसी ने पटना में इस केस को लेकर FIR दर्ज कर ली। 31 जनवरी को राज्य सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की थी और करीब 12 दिन बाद एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर केस अपने हाथ में ले लिया है।
यह मामला पिछले कई हफ्तों से सुर्खियों में है। घटना को 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन SIT अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। जांच के दौरान 18 लोगों के DNA सैंपल लिए गए, लेकिन सभी सैंपल मैच नहीं कर पाए। वहीं AIIMS की फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार अब भी जारी है, जिससे कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद थी।
इधर, पीड़िता का परिवार लगातार पुलिस पर दबाव बनाने और जांच को सही दिशा में नहीं ले जाने का आरोप लगा रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें SIT की जांच पर भरोसा नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर CBI जांच की जरूरत क्यों पड़ी? क्या SIT किसी निष्कर्ष तक पहुंचने में विफल रही? क्या परिवार के असंतोष और बढ़ते जनदबाव ने सरकार को यह फैसला लेने पर मजबूर किया? या फिर विधानसभा सत्र के दौरान बढ़ते राजनीतिक दबाव और जवाबदेही से बचने के लिए यह कदम उठाया गया?
CBI की एंट्री के बाद उम्मीद की जा रही है कि जांच नए सिरे से और व्यापक तरीके से होगी। एजेंसी तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर केस की परत-दर-परत जांच करेगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या CBI इस गुत्थी को सुलझा पाएगी और पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिला