आज मकर संक्रांति के मौके पर बिहार में दही-चूड़ा भोज के साथ सियासत भी पूरी तरह से गरमाती नजर आ रही है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक दिग्गजों के आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया जा रहा है। बिहार सरकार में मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर भी पारंपरिक दही-चूड़ा भोज रखा गया है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शामिल होने की संभावना है। यह भोज न सिर्फ परंपरा का प्रतीक है, बल्कि सत्ता पक्ष की एकजुटता का संदेश भी देता है।
लेकिन आज सबसे ज्यादा चर्चा तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज की हो रही है। राजनीतिक गलियारों की नजरें इसी आयोजन पर टिकी हुई हैं। तेज प्रताप यादव ने इस भोज के लिए सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेताओं को न्योता दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया है।
परिवार से अलग होने के बाद मंगलवार को तेज प्रताप यादव राबड़ी आवास पहुंचे थे, जहां उन्होंने पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव को व्यक्तिगत रूप से दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया। इस मुलाकात के दौरान भावुक दृश्य भी देखने को मिला, जब तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव की बेटी कात्यायनी को गोद में लिया। यह तस्वीरें और दृश्य सियासी के साथ-साथ पारिवारिक संदेश भी दे रही हैं।
तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में दही-चूड़ा और तिलकुट के साथ-साथ लाहोरी जूस का भी विशेष इंतजाम किया गया है। हालांकि इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने उन नेताओं को भी आमंत्रित किया है, जिनकी राजनीति सीधे तौर पर आरजेडी की विचारधारा के खिलाफ मानी जाती है। इसे बिहार की राजनीति में नए संदेश और संभावित नए समीकरणों की ओर इशारा माना जा रहा है।
दही-चूड़ा भोज की परंपरा लालू प्रसाद यादव की पहचान रही है और हर साल यह आयोजन बिहार के राजनीतिक कैलेंडर का अहम हिस्सा रहा है। इस बार जब लालू यादव खुद भोज का आयोजन नहीं कर रहे हैं, तब तेज प्रताप यादव इसे अपने अंदाज में आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस आयोजन के जरिए तेज प्रताप यादव अपनी अलग राजनीतिक और व्यक्तिगत पहचान को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं।