बिहार विधानसभा में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन की कुल 19 स्थायी और विषयगत समितियों का गठन कर दिया है। इस फैसले को विधानसभा की कार्यप्रणाली, सत्ता–विपक्ष के संतुलन और आने वाले सत्रों की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस समिति गठन की सबसे बड़ी और अहम बात यह है कि राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र को लोक लेखा समिति का सभापति बनाया गया है। लोक लेखा समिति, यानी पब्लिक अकाउंट्स कमेटी, सरकार के खर्चों, वित्तीय लेन–देन और महालेखाकार की रिपोर्ट की जांच करती है। यह समिति सीधे तौर पर सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी होती है। ऐसे में भाई वीरेंद्र को यह जिम्मेदारी मिलना विपक्ष के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
भाई वीरेंद्र लंबे समय से विधानसभा में सक्रिय रहे हैं और संसदीय प्रक्रियाओं का अच्छा अनुभव रखते हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में लोक लेखा समिति सरकारी खर्चों और योजनाओं की गहन समीक्षा करेगी, जिससे सरकार पर निगरानी और सख्त हो सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार स्वयं तीन महत्वपूर्ण समितियों के सभापति होंगे। इनमें नियम समिति, सामान्य प्रयोजन समिति और विशेषाधिकार समिति शामिल हैं। ये तीनों समितियां विधानसभा की कार्यवाही, सदन के विशेषाधिकार और प्रशासनिक अनुशासन से जुड़ी होती हैं। अध्यक्ष का इन समितियों की कमान संभालना यह संकेत देता है कि विधानसभा की व्यवस्था को अधिक मजबूत और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
समिति गठन में कई पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा को प्राक्कलन समिति का सभापति बनाया गया है, जो विभिन्न विभागों के बजटीय प्रावधानों और खर्चों का आकलन करती है। जदयू के वरिष्ठ विधायक हरिनारायण सिंह को सरकारी उपक्रम समिति की जिम्मेदारी दी गई है, जो राज्य सरकार के उपक्रमों और सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज की समीक्षा करेगी।
जनक सिंह को याचिका समिति का सभापति बनाया गया है, जहां आम लोगों से जुड़ी शिकायतों और याचिकाओं पर विचार किया जाता है। दामोदर रावत को राजकीय आश्वासन समिति की कमान सौंपी गई है, जो सरकार द्वारा सदन में दिए गए वादों और आश्वासनों के क्रियान्वयन की निगरानी करती है।
अमरेंद्र कुमार पांडेय को प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति का सभापति बनाया गया है, जो सदन में पूछे जाने वाले सवालों और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों से जुड़े मामलों को देखेगी। शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को जिला परिषद एवं पंचायती राज समिति की जिम्मेदारी दी गई है, जो ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन से जुड़े मुद्दों पर काम करेगी।
संतोष कुमार निराला को अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति का सभापति बनाया गया है, जबकि सिद्धार्थ सौरभ को निवेदन समिति का जिम्मा सौंपा गया है। अश्वमेघ देवी को महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति नियुक्त किया गया है, जो महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करेगी।
इसके अलावा संजीव चौरसिया को आचार समिति, अवधेश सिंह को पर्यावरण समिति, अख्तरुल इमान को अल्पसंख्यक कल्याण समिति, मनोरंजन सिंह को पर्यटन उद्योग समिति, रेणु सिंह को विरासत विकास समिति और निशा सिंह को कारा सुधार समिति का सभापति बनाया गया है।
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा में गठित इन 19 समितियों के जरिए सरकार और विपक्ष दोनों को नीतिगत, प्रशासनिक और निगरानी की भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। खास तौर पर लोक लेखा समिति की जिम्मेदारी विपक्ष को सौंपे जाने को लोकतांत्रिक संतुलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन समितियों की सक्रियता विधानसभा की कार्यवाही और सरकार की जवाबदेही तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।