विजय चौक बना राष्ट्रभक्ति का मंच, बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में तीनों सेनाओं ने राष्ट्रपति को दिया नेशनल सैल्यूट

विजय चौक बना राष्ट्रभक्ति का मंच, बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में तीनों सेनाओं ने राष्ट्रपति को दिया नेशनल सैल्यूट

विजय चौक बना राष्ट्रभक्ति का मंच, बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में तीनों सेनाओं ने राष्ट्रपति को दिया नेशनल सैल्यूट
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jan 29, 2026, 6:55:00 PM

दिल्ली के ऐतिहासिक विजय चौक पर गुरुवार शाम बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन हुआ, जिसके साथ ही गणतंत्र दिवस के चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रमों का औपचारिक समापन हो गया। इस भव्य आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उपस्थित रहीं, जबकि देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी समारोह का साक्षी बनकर आनंद लिया।

समारोह की शुरुआत सेना द्वारा राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सलामी दिए जाने से हुई। इसके बाद तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराया गया और राष्ट्रगान की धुन गूंजी। तीनों सेनाओं के संयुक्त बैंड ने प्रसिद्ध सैन्य मार्च ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ से संगीतमय प्रस्तुतियों का आगाज़ किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों सहित कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। विजय चौक और आसपास की प्रमुख इमारतों को आकर्षक रंगीन रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा इलाका उत्सव के रंग में डूबा नजर आया।

अलग-अलग बैंड्स की मनमोहक प्रस्तुतियां

संयुक्त सेना के पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड ने ‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली-जुली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी मधुर धुनें प्रस्तुत कीं।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के बैंड ने ‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनों से माहौल में देशभक्ति का संचार किया।

भारतीय वायुसेना के बैंड ने ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ की प्रस्तुतियां दीं। वहीं नौसेना बैंड ने ‘हम तैयार हैं’, ‘सागर पवन’, ‘मां तुझे सलाम’, ‘जोशीला देश’ और ‘जय भारती’ के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भारतीय थलसेना के बैंड ने कार्यक्रम को और ऊंचाई दी। उन्होंने ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड’, ‘ऐ वतन ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’, ‘आता उठवू सारे रान’, ‘देस मारो माटी नो रंग चे’, ‘देह शिवा वर मोहे’ और राग भैरव पर आधारित प्रस्तुतियों से समारोह को यादगार बना दिया।

समारोह के अंतिम चरण में संयुक्त बैंड द्वारा ‘भारत की शान’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘ड्रमर्स कॉल’ बजाए गए। अंत में बिगुलरों की अमर धुन ‘सारे जहां से अच्छा’ के साथ बीटिंग द रिट्रीट का औपचारिक समापन हुआ।

भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर सीटिंग एनक्लोजर

इस वर्ष बीटिंग द रिट्रीट की एक खास पहचान यह रही कि विजय चौक के दर्शक दीर्घाओं (सीटिंग एनक्लोजर) को भारतीय पारंपरिक वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए। इनमें बांसुरी, डमरू, एकतारा, तबला, वीणा, सितार, शहनाई, संतूर, सरोद, पखावज, नगाड़ा और मृदंगम शामिल हैं। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान को दर्शाती है।

गणतंत्र दिवस परेड 2026: सर्वश्रेष्ठ टुकड़ी और झांकियों के नतीजे

बीटिंग द रिट्रीट से एक दिन पहले गणतंत्र दिवस परेड 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टुकड़ियों और झांकियों के पुरस्कारों की घोषणा की गई। तीनों सेनाओं में भारतीय नौसेना को सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी चुना गया, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और सहायक बलों की श्रेणी में दिल्ली पुलिस को पहला स्थान मिला।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकी श्रेणी में महाराष्ट्र ने ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ थीम के साथ पहला स्थान प्राप्त किया। जम्मू-कश्मीर को ‘हस्तशिल्प और लोक नृत्य’ आधारित झांकी के लिए दूसरा स्थान मिला, जबकि केरल ने ‘वॉटर मेट्रो और 100% डिजिटल साक्षरता’ थीम के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

केंद्रीय मंत्रालयों की श्रेणी में संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम - द सोल क्राई ऑफ ए नेशन’ थीम वाली झांकी को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। इसके अलावा सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को ‘वंदे मातरम: 150 सालों का स्मरण’ और डांस ग्रुप ‘वंदे मातरम: द इटरनल रेजोनेंस ऑफ इंडिया’ के लिए विशेष पुरस्कार दिए गए।

300 साल पुरानी परंपरा

बीटिंग द रिट्रीट की परंपरा का इतिहास तीन शताब्दियों से भी अधिक पुराना है। राजाओं और युद्धकाल के दौर में सूर्यास्त के समय बिगुल बजाकर युद्ध रोकने और सैनिकों को पीछे हटने का संकेत दिया जाता था। यही परंपरा आज एक सांस्कृतिक-सैन्य समारोह के रूप में दुनिया के कई देशों जैसे भारत, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में निभाई जाती है। भारत में इस समारोह की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी।