भारत और पाकिस्तान ने आपसी तनाव के बावजूद परमाणु सुरक्षा से जुड़ी एक अहम प्रक्रिया को निभाते हुए 1 जनवरी को अपने-अपने परमाणु ठिकानों और सुविधाओं की जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा की है। यह कदम दोनों देशों के बीच वर्षों पुराने औपचारिक समझौते के तहत उठाया गया है।
गौरतलब है कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत-पाक संबंधों में तीखापन बना हुआ है और आपसी भरोसा बेहद कमजोर दौर से गुजर रहा है। ऐसे माहौल में परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश न्यूक्लियर स्तर पर किसी भी तरह की चूक से बचना चाहते हैं।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह जानकारी “परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं पर हमला न करने” से जुड़े द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत साझा की गई है। यह प्रक्रिया भारत की राजधानी नई दिल्ली और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक साथ, कूटनीतिक माध्यमों के जरिए पूरी की गई।
यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षरित हुआ था और 27 जनवरी 1991 से प्रभावी है। इसके प्रावधानों के अनुसार, दोनों देशों को हर वर्ष 1 जनवरी को अपने-अपने परमाणु ठिकानों की सूची एक-दूसरे को देना अनिवार्य है।
रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस अभ्यास के जरिए भारत यह स्पष्ट संदेश देता है कि वह परमाणु हथियारों के उपयोग और प्रबंधन को लेकर पूरी तरह जिम्मेदार रुख अपनाए हुए है। वहीं पाकिस्तान भी भली-भांति समझता है कि न्यूक्लियर मोर्चे पर किसी भी तरह की गलती दोनों देशों के लिए विनाशकारी हो सकती है।