रामसर टैग के बाद उधवा पक्षी अभयारण्य पर कड़ी नजर, प्रवासियों पक्षियों के लिये बना सुरक्षित जोन

रामसर टैग के बाद उधवा पक्षी अभयारण्य पर कड़ी नजर, प्रवासियों पक्षियों के लिये बना सुरक्षित जोन

रामसर टैग के बाद उधवा पक्षी अभयारण्य पर कड़ी नजर, प्रवासियों पक्षियों के लिये बना सुरक्षित जोन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 16, 2025, 4:29:00 PM

झारखंड के साहिबगंज जिले में स्थित उधवा पक्षी अभयारण्य झील को इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में रामसर साइट का दर्जा मिला है। यह झारखंड की पहली और फिलहाल एकमात्र झील है, जिसे यह मान्यता प्राप्त हुई है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद अभयारण्य क्षेत्र में अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया है।

पूरे क्षेत्र में 10 सीसीटीवी कैमरे और दो पीटीजेड कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा ड्रोन की मदद से भी निगरानी की जा रही है ताकि पक्षियों और जलीय जीवों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। सभी कैमरे वायरलेस हैं और सोलर प्लेट से जुड़े हुए हैं, जिससे उनकी निगरानी निर्बाध रूप से जारी रहती है। कैमरों का डेटा क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित किया जा रहा है, जिसके लिए किसी केबल का उपयोग नहीं किया गया है।

पर्यटकों के लिए नए इंतजाम

हर साल नवंबर से फरवरी के अंत तक देश-विदेश से प्रवासी पक्षी उधवा झील का रुख करते हैं। सर्दियों में पक्षियों के आगमन के साथ ही झील और उसके आसपास का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। इस प्राकृतिक नज़ारे को देखने के लिए पर्यटक अभी से यहां पहुंचने लगे हैं।

वन विभाग ने सैलानियों के लिए चार शिकारा बोट और एक 15 सीटर बड़ी नाव की व्यवस्था की है। ये शिकारा बोट कश्मीर की डल झील में चलने वाली पारंपरिक लकड़ी की नावों की तर्ज पर हैं। पर्यटकों को नाममात्र शुल्क लेकर झील भ्रमण कराया जाता है। ठहरने के लिए तीन कॉटेज बनाए गए हैं, वहीं झील के बीच एक टापू पर हाइडआउट झोपड़ी तैयार की गई है, जहां से पक्षी प्रेमी शांत वातावरण में बैठकर पक्षियों की गतिविधियों को देख और रिकॉर्ड कर सकते हैं।

बढ़ता पक्षी संरक्षण क्षेत्र

565 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला उधवा पक्षी अभयारण्य पहले हजारीबाग वन प्रमंडल के अधीन था, लेकिन अब साहिबगंज वन प्रमंडल के नियंत्रण में आने के बाद इसके संरक्षण और विकास कार्यों में तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2009 में यहां करीब 2,815 विदेशी पक्षी दर्ज किए गए थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 25 हजार तक पहुंच गई है। कई दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र के महत्व को और बढ़ा दिया, जिसके आधार पर इसे रामसर साइट घोषित किया गया।

रामसर दर्जा मिलने के बाद राज्य सरकार और वन विभाग इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। संरक्षण और पर्यटन—दोनों के संतुलन के साथ उधवा झील को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी अब तेज हो चुकी है।