रांची : सेंट ज़ेवियर कॉलेज की छात्रा बरूज को मिला वैन विंकल मेमोरियल सम्मान

रांची : सेंट ज़ेवियर कॉलेज की छात्रा बरूज को मिला वैन विंकल मेमोरियल सम्मान

रांची : सेंट ज़ेवियर कॉलेज की छात्रा बरूज को मिला वैन विंकल मेमोरियल सम्मान
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 19, 2025, 2:39:00 PM

सेंट ज़ेवियर कॉलेज, रांची के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की पूर्व छात्रा और श्रीनगर निवासी बरूज को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित फ्रॉ. एस. वैन विंकल मेमोरियल अवॉर्ड से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें ₹5,000 की नकद राशि के साथ प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार सेमेस्टर I से VI तक सर्वाधिक समग्र अंक अर्जित करने, सर्वाधिक दक्ष विद्यार्थी (हाइएस्ट स्कोरर एवं एफिशिएंट स्टूडेंट) बनने और शैक्षणिक सत्र 2022–2025 में विभागीय टॉपर रहने के लिए दिया गया। सम्मान समारोह में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी. के. सिंह ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया।

कार्यक्रम में झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव राजकुमार गुप्ता (आईएएस), रांची जेसुइट सोसाइटी के प्रांतीय सुपीरियर रेव. फादर अजीत कुमार ज़ेस, एसजे सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

झारखंड के पहले फिल्मकार के नाम पर पुरस्कार

फ्रॉ. एस. वैन विंकल मेमोरियल अवॉर्ड का नामकरण झारखंड के पहले अग्रणी फिल्मकार के नाम पर किया गया है, जिन्हें ‘झारखंड का फाल्के’ भी कहा जाता है। उन्होंने जात्रा मेलों से जुड़े शुरुआती सिनेमाई दृश्य रिकॉर्ड किए थे, जिन्हें आज राज्य की फिल्मी विरासत के सबसे पुराने दस्तावेजों में गिना जाता है।

“यह सम्मान मेरी पूरी शैक्षणिक यात्रा का प्रतीक”

सम्मान स्वीकार करते हुए बरूज ने कहा कि यह उपलब्धि केवल अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी समग्र शैक्षणिक साधना का प्रतिफल है। उन्होंने जनसंचार शिक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि फैकल्टी की संख्या बढ़ाने, व्यावहारिक प्रशिक्षण और शोध-आधारित शिक्षण को मजबूत किया जाना चाहिए।

उनका मानना है कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच, बौद्धिक गहराई और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना होना चाहिए। डिजिटल युग में सूचना की सहज उपलब्धता के बीच असली मूल्य शोध, विश्लेषण और बाज़ारोन्मुख कौशल में निहित है।

मार्गदर्शन और संघर्ष की सराहना

बरूज ने अपनी अकादमिक प्रगति का श्रेय डॉ. प्रो. नील कुसुम कुल्लू के मार्गदर्शन में किए गए शोध कार्य को दिया, जिसने मीडिया और शिक्षा को लेकर उनकी विश्लेषणात्मक समझ को विस्तार दिया। इस अवसर पर प्रो. कुल्लू ने उनके संघर्ष और निरंतर प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह जीवन अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष करता है, उसी प्रकार बरूज ने भी निरंतर परिश्रम कर सफलता हासिल की।

आगे का सफर: पत्रकारिता से क़ानून तक

अकादमिक उपलब्धियों की कड़ी में बरूज ने CUET-PG 2025 में ऑल इंडिया रैंक 92 हासिल की। इसके आधार पर उनका चयन IIMC दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ। हालांकि, उन्होंने भविष्य की पढ़ाई के लिए क़ानून (लॉ) को चुना, जिसे वह पत्रकारिता, समाज और सार्वजनिक विमर्श से गहराई से जुड़ा हुआ विषय मानती हैं।

झारखंड से भावनात्मक जुड़ाव

अपने झारखंड प्रवास को याद करते हुए बरूज ने राज्य, यहां के लोगों और सांस्कृतिक विविधता के प्रति गहरा स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार किरो को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से समृद्ध मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।

साथ ही हिंदी विभाग के सीनियर सचिन कुमार के प्रति आभार जताया, जिन्होंने बड़े भाई की तरह उनका मार्गदर्शन किया, उन्हें सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा और तीन वर्षों तक निरंतर नैतिक सहयोग दिया। कॉलेज प्रशासन को भी उन्होंने बिहार और ओडिशा में आयोजित शोध प्रस्तुतियों के लिए आर्थिक सहायता देने पर धन्यवाद दिया।

छात्रों के नाम संदेश

छात्रों को संबोधित करते हुए बरूज ने कहा कि विद्यार्थी किसी भी शैक्षणिक संस्थान की आत्मा होते हैं। जब तक यह आत्मा बौद्धिक और अकादमिक रूप से सशक्त नहीं होगी, तब तक व्यवस्था को दोष देना निरर्थक है। विश्लेषणात्मक क्षमता और वैज्ञानिक सोच ही उच्च शिक्षा की वास्तविक बुनियाद हैं।

अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा कि झारखंड के पहले फिल्मकार के नाम पर मिला यह सम्मान न केवल उनकी सीखने की यात्रा का सम्मान है, बल्कि भविष्य में फिल्म निर्माण से जुड़ने की उनकी आकांक्षा से भी भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है।