लंबित मामलों को लेकर सख्त हुई पुलिस, 5 IPS अधिकारियों को मिली त्वरित निपटारे की जिम्मेदारी

लंबित मामलों को लेकर सख्त हुई पुलिस, 5 IPS अधिकारियों को मिली त्वरित निपटारे की जिम्मेदारी

लंबित मामलों को लेकर सख्त हुई पुलिस, 5 IPS अधिकारियों को मिली त्वरित निपटारे की जिम्मेदारी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 06, 2025, 1:08:00 PM

झारखंड डीजीपी मुख्यालय ने राज्यभर में लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निपटारे के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत पांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग रेंज की जिम्मेदारी देते हुए निर्देश दिया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर अपने क्षेत्र के सभी जिलों में लंबित कांडों की विस्तृत समीक्षा करें और पुलिस कार्रवाई शीघ्र पूरी करवाएं।

जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक मामले की अंतिम रिपोर्ट प्राथमिकी दर्ज होने के 60 या 90 दिनों के अंदर अदालत में दाखिल की जानी चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी रिपोर्टें सीसीटीएनएस पोर्टल के माध्यम से ही प्रस्तुत हों।

जिन अधिकारियों को सौंपे गए रेंज की जिम्मेदारी:

  • आईजी मनोज कौशिक – रांची रेंज

  • डीआईजी वाई. एस. रमेश – संथाल परगना एवं हजारीबाग रेंज

  • डीआईजी कार्तिक एस – कोयला क्षेत्र, बोकारो रेंज

  • डीआईजी चंदन झा – कोल्हान रेंज

  • एसपी एहतेशाम वकारीब – पलामू रेंज

एडीजी अभियान की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक

लंबित मामलों की प्रगति जानने और रणनीति पर आगे की दिशा तय करने के लिए शनिवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता एडीजी अभियान करेंगे, जिसमें सभी रेंजों की रिपोर्ट और प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

एक महीने में 6,115 केस निपटाए, पर अब भी 48 हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग

झारखंड पुलिस ने पिछले एक महीने में 6,115 पुराने मामलों का निपटारा कर सराहनीय उपलब्धि हासिल की है। इस अवधि में हजारीबाग जिला 939 मामलों के निपटारे के साथ सबसे आगे रहा, जबकि धनबाद (709) और रांची (689) इसके बाद रहे।

इसके बावजूद, बड़ी चुनौती यह है कि राज्य के विभिन्न थानों में 48,287 से अधिक मामलों का बोझ अभी भी बाकी है। इनमें हत्या, डकैती, बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों से लेकर चोरी और मारपीट जैसे सामान्य मामले भी शामिल हैं।

राज्य पुलिस उम्मीद कर रही है कि नए निर्देशों और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी से मामलों के निपटारे की रफ्तार और तेज होगी।