राष्ट्र ने किया गोवा मुक्ति के नायकों को नमन, राष्ट्रपति से लेकर नेताओं तक श्रद्धांजलि

राष्ट्र ने किया गोवा मुक्ति के नायकों को नमन, राष्ट्रपति से लेकर नेताओं तक श्रद्धांजलि

राष्ट्र ने किया गोवा मुक्ति के नायकों को नमन, राष्ट्रपति से लेकर नेताओं तक श्रद्धांजलि
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 19, 2025, 2:50:00 PM

गोवा मुक्ति दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लंबे संघर्ष में योगदान देने वाले वीरों को स्मरण करते हुए देश का नेतृत्व किया और उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके बलिदान से गोवा का भारत में विलय संभव हो पाया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि गोवा मुक्ति दिवस उन सभी साहसी व्यक्तियों को कृतज्ञता के साथ याद करने का अवसर है, जिन्होंने उपनिवेशवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए गोवा के नागरिकों के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की कामना की।

केंद्रीय गृह मंत्री का संदेश

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गोवा की जनता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आज की पीढ़ी शायद यह नहीं जानती कि वर्ष 1961 से पहले भारतीयों को गोवा जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी। उन्होंने प्रभाकर वैद्य, बाला राया मापरी, नानाजी देशमुख और जगन्नाथ राव जोशी जैसे नेताओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन्हीं संघर्षों और बलिदानों के परिणामस्वरूप गोवा भारत का अभिन्न हिस्सा बन सका। उन्होंने गोवा की आज़ादी के लिए अत्याचार सहने वाले सभी देशभक्तों को सम्मानपूर्वक नमन किया।

कांग्रेस ने भी किया ऐतिहासिक दिन का स्मरण

कांग्रेस पार्टी ने भी गोवा, दमन और दीव मुक्ति दिवस को ऐतिहासिक बताते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि यह वह निर्णायक क्षण था, जब इन क्षेत्रों को पुर्तगाली शासन से स्वतंत्रता मिली। पार्टी के अनुसार, यह दिन स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है, जिसने इन क्षेत्रों को भारतीय संघ में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त किया।

19 दिसंबर का ऐतिहासिक महत्व

19 दिसंबर गोवा के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। इसी दिन 1961 में गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कर औपचारिक रूप से भारत में शामिल किया गया था। उल्लेखनीय है कि गोवा पर पुर्तगाल का शासन करीब 451 वर्षों तक रहा, जो भारत में किसी भी औपनिवेशिक सत्ता की सबसे लंबी अवधि मानी जाती है।

जहां देश के अधिकांश हिस्सों को 1947 में ब्रिटिश शासन से आज़ादी मिल गई थी, वहीं पुर्तगाल ने न तो गोवा को स्वतंत्र करने की सहमति दी और न ही भारत में इसके विलय को स्वीकार किया। पुर्तगाली प्रशासन का तर्क था कि गोवा कोई उपनिवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से पुर्तगाल का अभिन्न अंग है।

ऑपरेशन विजय और आज़ादी का मार्ग

औपनिवेशिक शासन के अंत के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन विजय’ की शुरुआत की। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संचालित इस सैन्य कार्रवाई में थल, जल और वायु—तीनों सेनाओं ने समन्वित भूमिका निभाई। यह अभियान लगभग 36 घंटे में सफलतापूर्वक पूरा हुआ और गोवा को आज़ादी मिली।

जन आंदोलन और राष्ट्रवादी चेतना

गोवा की मुक्ति की प्रक्रिया में कई नेताओं और आम नागरिकों ने आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के जरिए सक्रिय योगदान दिया। टी.बी. कुन्हा को ‘गोवन राष्ट्रवाद का जनक’ माना जाता है। उन्होंने गोवा में औपनिवेशिक शासन के खिलाफ पहला संगठित आंदोलन शुरू किया। महात्मा गांधी के साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलनों से प्रेरित होकर, फ्रांस से शिक्षा प्राप्त करने के बाद कुन्हा भारत लौटे और गोवा की स्वतंत्रता को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया।