झारखंड में खनन संकट गहराया, 4,745 में से 3,635 लीज लैप्स, उत्पादन पर ब्रेक

झारखंड में खनन संकट गहराया, 4,745 में से 3,635 लीज लैप्स, उत्पादन पर ब्रेक

झारखंड में खनन संकट गहराया, 4,745 में से 3,635 लीज लैप्स, उत्पादन पर ब्रेक
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 20, 2025, 4:52:00 PM

झारखंड में खनन क्षेत्र गंभीर प्रशासनिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राज्य में मेजर मिनरल और लघु खनिज के कुल 4,745 खनन पट्टों में से 3,635 लीज की वैधता समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में केवल 823 लीजधारक ही सक्रिय रूप से खनन कार्य कर पा रहे हैं। हालात इतने चिंताजनक हैं कि अस्थायी रूप से डिस्पैच की अनुमति सिर्फ एक ही लीजधारक को मिली है, जबकि 286 लीजधारक ‘नॉन-वर्किंग’ श्रेणी में चले गए हैं।

कोयला खनन की स्थिति: कई सर्किलों में काम ठप

मेजर मिनरल के तहत कोयला खनन की बात करें तो धनबाद सर्किल सबसे अधिक प्रभावित नजर आता है। यहां कुल 133 कोयला लीजधारकों में से 52 ने अस्थायी रूप से काम रोक दिया है, जबकि 19 लीज पूरी तरह लैप्स हो चुकी हैं।
दुमका सर्किल में 23 में से 19 लीज समाप्त हो चुकी हैं। हजारीबाग में 47 लीजधारकों में से एक अस्थायी रूप से बंद है और 11 की लीज की अवधि खत्म हो गई है। कोल्हान सर्किल में मौजूद एकमात्र कोयला लीज भी लैप्स हो चुकी है, जबकि पलामू में 11 में से सात लीजधारकों का पट्टा खत्म हो गया है।

नॉन-कोल मेजर मिनरल में भी हालात चिंताजनक

कोयला के अलावा अन्य मेजर मिनरल में भी हालात बेहतर नहीं हैं। कोल्हान सर्किल में नॉन-कोल श्रेणी के 97 लीजधारकों में से 84 की लीज समाप्त हो चुकी है। रांची सर्किल में 48 लीजधारकों में 24 का पट्टा लैप्स हो गया है और छह अस्थायी रूप से बंद हैं।
हजारीबाग में नॉन-कोल के सभी 13 लीजधारकों की लीज खत्म हो चुकी है। वहीं धनबाद में सात में से तीन लीज लैप्स और दो अस्थायी रूप से बंद हैं। दुमका में मौजूद दोनों लीज समाप्त हो चुकी हैं, जबकि पलामू में 17 में से 13 लीजधारकों का पट्टा खत्म हो गया है।

लघु खनिज: सबसे बड़ा झटका

माइनर मिनरल यानी लघु खनिज क्षेत्र में संकट सबसे ज्यादा गहरा है। दुमका सर्किल में 1,610 लीजधारकों में से 1,251 की लीज समाप्त हो चुकी है। धनबाद में 611 में से 494, हजारीबाग में 641 में से 538 और कोल्हान में 475 में से 409 लीज लैप्स हो गई हैं।
रांची सर्किल में 717 लीजधारकों में 577 की लीज खत्म हो चुकी है, जबकि पलामू में 291 में से 176 लीजधारकों का पट्टा समाप्त हो गया है।

जिलावार तस्वीर: कई जिलों में सैकड़ों लीज समाप्त

जिलों के स्तर पर देखें तो साहेबगंज में सबसे अधिक 360 लीज समाप्त हुई हैं। इसके बाद पाकुड़ में 309, दुमका में 291 और रांची में 285 लीजधारकों का पट्टा खत्म हो चुका है। गिरिडीह (197), रामगढ़ (206), बोकारो (166), चाईबासा (176) और जमशेदपुर (172) में भी बड़ी संख्या में लीज लैप्स हुई हैं।
अन्य जिलों में देवघर (144), सरायकेला (144), धनबाद (153), हजारीबाग (117), पलामू (115), जामताड़ा (92), चतरा (85), खूंटी (78), गुमला (74), गोड्डा (72), सिमडेगा (58), गढ़वा (49) और लातेहार (27) शामिल हैं।

उद्योग और राजस्व पर संभावित असर

खनन पट्टों की बड़े पैमाने पर समाप्ति से न सिर्फ खनिज उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि इससे जुड़े रोजगार, उद्योग और राज्य के राजस्व पर भी सीधा असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो झारखंड का खनन सेक्टर और अधिक दबाव में आ सकता है।