झारखंड राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था गंभीर वित्तीय दबाव से गुजर रही है। झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) की ताजा वित्तीय स्थिति बताती है कि कंपनी की आय और व्यय के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है, जिससे कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।
आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वितरण निगम की कुल आय 10,721.65 करोड़ रुपये रही, जबकि खर्च 12,649.81 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस असंतुलन का नतीजा यह है कि निगम पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 13,928.93 करोड़ रुपये हो गया है। बीते वर्ष की तुलना में यह कर्ज 2,602.48 करोड़ रुपये और बढ़ा है। वहीं, निगम की कुल देनदारी 35,245.06 करोड़ रुपये बताई गई है।
यह कर्ज पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी), वर्ल्ड बैंक और राज्य सरकार से लिया गया है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में पीएफसी से 975.84 करोड़, आरईसी से 1,180.39 करोड़, वर्ल्ड बैंक से 145 करोड़ और राज्य सरकार से 9,025.21 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज किया गया। वहीं एक अन्य विवरण में राज्य सरकार से कर्ज का आंकड़ा 11,736.37 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है।
कर्ज के साथ-साथ ब्याज भुगतान भी निगम की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। बैंक और टर्म लोन पर ब्याज तथा अन्य बैंक शुल्क चुकाने में ही 1,797.28 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसमें बैंक लोन का ब्याज 109.60 करोड़, टर्म लोन का ब्याज 1,683.21 करोड़ और बैंक चार्ज 4.45 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा प्रशासनिक खर्च 267.30 करोड़ और रिपेयर व मेंटेनेंस पर 452.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
आय के स्रोतों की बात करें तो सबसे अधिक राजस्व घरेलू उपभोक्ताओं से मिला, जो 4,404.29 करोड़ रुपये रहा। औद्योगिक उच्च दाब (एचटी) श्रेणी से 2,169.93 करोड़ और औद्योगिक निम्न दाब (एलटी) से 284.02 करोड़ रुपये की आय हुई। इसके अलावा वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से 900.42 करोड़, रेलवे से 128.08 करोड़ और व्हीलिंग चार्ज से 333.98 करोड़ रुपये की आमदनी दर्ज की गई। अन्य मदों जैसे मीटर रेंट, कैपिटल वर्क और विविध शुल्क से सीमित आय हुई।
निगम को अनुदान और अन्य स्रोतों से भी आमदनी मिली है। इसमें 575.39 करोड़ रुपये का अनुदान, फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज, उपभोक्ताओं से वसूला गया विलंब भुगतान अधिभार और संदिग्ध ऋण की वसूली शामिल है, जिससे कुछ हद तक वित्तीय संतुलन बनाने की कोशिश की गई।