राज्य सरकार ने सरकारी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं के त्वरित निपटारे के लिए एक औपचारिक शिकायत निवारण व्यवस्था तैयार की है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस संबंध में ‘ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म’ का ड्राफ्ट सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को भेज दिया है।
अब विश्वविद्यालयों को इसे अपने-अपने सिंडिकेट से अनुमोदित कराकर विभाग को वापस भेजना होगा, जिसके बाद यह व्यवस्था राज्यभर में लागू की जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों को शिकायत दर्ज कराने के लिए एक स्पष्ट मंच मिलेगा। वे शैक्षणिक सुविधाओं में कमी, प्रोस्पेक्टस में दर्शाई गई सुविधाओं का लाभ न मिलने, भेदभाव, उत्पीड़न, नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता, छात्र संघ चुनाव, नियमों के उल्लंघन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध न होने जैसी समस्याओं को लेकर शिकायत कर सकेंगे।
प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, हर कॉलेज स्तर पर एक शिकायत निवारण समिति गठित होगी। इसके अध्यक्ष प्राचार्य या प्रोफेसर-इन-चार्ज होंगे। समिति में कुलपति द्वारा नामित किसी विभागाध्यक्ष या वरिष्ठ शिक्षक को सदस्य बनाया जाएगा। वहीं प्राचार्य द्वारा नामित दो वरिष्ठ शिक्षक भी समिति में शामिल रहेंगे।
एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया जाएगा, जबकि एक छात्र प्रतिनिधि को आमंत्रित सदस्य के रूप में रखा जाएगा।
विश्वविद्यालय स्तर पर शिकायतों की सुनवाई के लिए अलग समिति बनेगी, जिसकी अध्यक्षता डायरेक्टर ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स (DSW) करेंगे। इसमें प्रॉक्टर के अलावा कुलपति द्वारा नामित पांच प्रोफेसर सदस्य होंगे। साथ ही अंतिम वर्ष के दो छात्र भी समिति में सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
रजिस्ट्रार को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। ड्राफ्ट में यह भी अनिवार्य किया गया है कि समिति में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग से कम से कम एक सदस्य जरूर हो। सभी सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष तय किया गया है।
ड्राफ्ट में यह भी प्रावधान रखा गया है कि शिक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मचारियों की शिकायतों के लिए एक अलग समिति बनाई जाएगी। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।
इस समिति में एक डीन, सिंडिकेट से नामित एक सदस्य, रजिस्ट्रार, एससी/एसटी वर्ग से एक शिक्षक तथा वित्त और प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी को सदस्य बनाया जाएगा। समिति के सदस्य सचिव की भूमिका प्रॉक्टर निभाएंगे। अध्यक्ष को आवश्यकता पड़ने पर अन्य सदस्यों को आमंत्रित करने का अधिकार भी होगा।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह तंत्र सीधे लागू नहीं होगा। पहले सभी विश्वविद्यालय इसे अपने सिंडिकेट से स्वीकृत कराएंगे, इसके बाद विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। अंतिम मंजूरी मिलने पर यह व्यवस्था पूरे राज्य में प्रभावी कर दी जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रोफेसर संघ के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार ने इसे एक स्वागतयोग्य पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यदि समितियों का गठन पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से किया जाए तथा शिकायतों का समाधान समय पर हो, तो इससे विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक माहौल बेहतर हो सकता है।