रामगढ़ जिले में जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही लोगों के लिए डर का कारण बनती जा रही है। बीते करीब एक सप्ताह से हाथियों का एक झुंड अपने पारंपरिक कॉरिडोर में घूमते हुए लगातार रिहायशी और यातायात क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान उनके रास्ते में जो भी आया, उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। अब तक हाथियों के हमलों में नौ लोगों की जान जा चुकी है।
शनिवार की सुबह स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब जंगल से निकलकर एक विशालकाय हाथी राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर आ गया। घने कोहरे के बीच अचानक सामने हाथी दिखने से अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में सड़क के दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और वाहन चालकों व यात्रियों को घंटों गाड़ियों में ही फंसे रहना पड़ा।
हालात उस वक्त संभले जब वन विभाग की टीम समय रहते मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने सतर्कता और रणनीति के साथ हाथी को नियंत्रित किया और उसे सुरक्षित वन्य कॉरिडोर की दिशा में वापस भेजा। यदि थोड़ी भी देर होती, तो NH-33 पर बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। हाथी के हटते ही जाम खुला और यातायात सामान्य हो सका।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कड़ाके की ठंड और घना कोहरा वन विभाग के लिए अतिरिक्त चुनौती बना रहा। कभी घाटो क्षेत्र, कभी कुजू और कभी रामगढ़ शहर की सीमा तक भटक रहे हाथियों को सुरक्षित मार्ग पर लौटाने के लिए विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं।
फिलहाल रामगढ़ में हाथियों की अनियंत्रित आवाजाही वन विभाग के लिए बड़ी परीक्षा बन गई है, वहीं आम लोग भी भय और सतर्कता के बीच रोजमर्रा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।