राज्य में नगर निकाय चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार व्यापक निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग का लक्ष्य है कि धन-बल के सहारे चुनावी जीत हासिल करने की कोशिशों पर समय रहते रोक लगाई जा सके। पिछले चुनावों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी 48 शहरी निकायों में व्यय पर्यवेक्षकों के साथ-साथ सामान्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। ये अधिकारी उम्मीदवारों की गतिविधियों और चुनावी खर्च पर लगातार नजर रखेंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रत्याशी या उसके समर्थकों द्वारा चुनाव के दौरान गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने कहा कि आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता स्वच्छ, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है। उन्होंने उम्मीदवारों से अपील की कि वे चुनाव संबंधी सभी निर्देशों का पालन करें।
चुनावी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इन कंट्रोल रूम में अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि चुनाव से जुड़ी किसी भी शिकायत या सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी है।
10 लाख से अधिक आबादी वाले क्षेत्र
महापौर/अध्यक्ष: अधिकतम 25 लाख रुपये
वार्ड पार्षद: अधिकतम 5 लाख रुपये
10 लाख से कम आबादी वाले क्षेत्र
महापौर/अध्यक्ष: अधिकतम 15 लाख रुपये
वार्ड पार्षद: अधिकतम 3 लाख रुपये
आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी उम्मीदवार इन्हीं सीमाओं के भीतर रहकर चुनावी खर्च करेंगे।
बैंक खाता अनिवार्य, रोजाना देना होगा खर्च का हिसाब
चुनाव खर्च को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग के आदेश पर हर प्रत्याशी का बैंक खाता खुलवाया गया है। इसके साथ ही उम्मीदवारों को प्रतिदिन अपने खर्च का विवरण संबंधित नगर निकाय कार्यालय में जमा करना अनिवार्य किया गया है। चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार सामग्री और अन्य मदों के लिए खर्च की दरें पहले से निर्धारित कर रखी हैं। इन्हीं दरों के आधार पर उम्मीदवारों को व्यय पंजी में प्रविष्टि करनी होगी और चुनाव समाप्त होने के बाद समेकित रिपोर्ट जमा करनी होगी।
आयोग ने बताया कि पिछली बार नगर निकाय चुनाव में मतदान से ठीक पहले एक प्रत्याशी के पैसे के लेन-देन में पकड़े जाने के कारण चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार निगरानी व्यवस्था को और अधिक सतर्क बनाया गया है।