पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शैक्षणिक सत्र 2025-26 में मेडिकल MBBS नामांकन प्रक्रिया को लेकर एक लंबा पत्र लिखा है। इस पत्र में मरांडी ने JCECEB (Jharkhand Combined Entrance Competitive Examination Board) द्वारा हुई कथित अनियमितताओं का खुलासा करते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए दोषियों को बर्खास्त करने और नामांकन प्रक्रिया को रद्द कर पुनः सही तरीके से काउंसलिंग कराने का आग्रह किया है।
मरांडी ने पत्र में बताया कि इस वर्ष की मेडिकल नामांकन प्रक्रिया में JCECEB ने आरक्षित एवं अनारक्षित कोटे में कई गड़बड़ियाँ कीं, जिससे योग्य एवं मेधावी झारखंड के छात्रों को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी शिकायतें सामने आई थीं और JCECEB ने कुछ हद तक यह स्वीकार किया कि सीट आवंटन में अनियमितताएँ हुईं।
पत्र के अनुसार, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 19 नवंबर 2025 को एक तीन सदस्यीय समिति गठित कर नामांकन हेतु अभ्यर्थियों के जाति एवं निवास प्रमाण पत्रों की जांच की। जांच में पाया गया कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज बनवाकर सीटें हासिल कीं। उदाहरण के तौर पर, आशीष कुमार और पुष्पम कुमारी ने बाहरी राज्य से झारखंड निवासी साबित होने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए और RIMS में सीटें लीं। इसके अलावा सुचारिता दास, काजल, भाविनी और अन्य ने भी नकली दस्तावेजों के माध्यम से नामांकन कराया।
मरांडी ने यह भी उल्लेख किया कि MCC (Medical Counselling Committee) के दिशानिर्देशों के अनुसार, नामांकन के लिए आवेदन के समय जो जानकारी NTA को दी जाती है, वही काउंसलिंग के दौरान मान्य होती है। इसके बावजूद JCECEB ने NTA के डाटा का सही उपयोग किए बिना और लिंकिंग किए बिना काउंसलिंग की, जिससे अनियमितताओं को अंजाम देने का अवसर मिला।
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख मांगें की हैं:
JCECEB के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित या बर्खास्त कर कठोर कार्रवाई की जाए।
इस शैक्षणिक सत्र की MBBS काउंसलिंग प्रक्रिया रद्द कर, सही तरीके से पुनः काउंसलिंग कर सीटें आवंटित की जाएँ।
पूरे घोटाले और अनियमितताओं की निष्पक्ष CBI जांच कर दोषियों को कानूनी सजा दिलाई जाए।
मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि इन अनियमितताओं ने झारखंड के मूल अभ्यर्थियों के अधिकारों के साथ अन्याय किया है और यह राज्य की शिक्षा प्रणाली तथा मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता को चुनौती देता है।