नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक खींचतान, वित्त मंत्री के भाई की पेंशन अटकी

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक खींचतान, वित्त मंत्री के भाई की पेंशन अटकी

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक खींचतान, वित्त मंत्री के भाई की पेंशन अटकी
swaraj post

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Dec 22, 2025, 1:41:00 PM

झारखंड के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में चल रहे आंतरिक प्रशासनिक विवाद का असर सीधे शिक्षकों और सेवानिवृत्त कर्मियों पर पड़ता दिख रहा है। राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के बड़े भाई राधा रमण किशोर, जो विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं, उन्हें नवंबर माह की पेंशन अब तक नहीं मिल सकी है।

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, पेंशन और वेतन भुगतान में हो रही देरी की वजह कुलपति और वित्तीय प्रशासन के बीच चल रही खींचतान है। बताया जा रहा है कि कुलपति दिनेश सिंह वेतन और पेंशन मद की राशि तभी जारी करने पर सहमत हैं, जब विश्वविद्यालय के वित्तीय सलाहकार (एफए) बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी सहमति दें। जबकि वर्तमान में प्रभारी वित्तीय सलाहकार स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली में इलाज करा रहे हैं और उन्होंने पहले ही लिखित रूप में राशि निकासी की अनुमति दे दी है।

स्थिति यह है कि पेंशन के साथ-साथ उन शिक्षकों का वेतन भी लंबित है, जिनका भुगतान राज्य सरकार के माध्यम से किया जाता है। सरकार ने क्रिसमस को ध्यान में रखते हुए दिसंबर का वेतन 23 दिसंबर से जारी करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एनपीयू में दिसंबर का वेतन भी समय पर मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय के खाते में वेतन और पेंशन भुगतान के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है। विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत वित्तीय सलाहकार की सहमति अनिवार्य है, जो लिखित रूप में पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद कुलपति बैठक में एफए की व्यक्तिगत मौजूदगी की शर्त पर अड़े हुए हैं, जिससे भुगतान प्रक्रिया ठप पड़ी है।

इस प्रशासनिक गतिरोध का खामियाजा केवल वित्त मंत्री के बड़े भाई तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय के कार्यरत शिक्षक और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि कुलपति दिनेश सिंह का नाम पहले भी विवादों से जुड़ चुका है। विनोबा भावे विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति रहते हुए वे लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से गेस्ट हाउस के नवीनीकरण की असफल पहल को लेकर चर्चा में रहे थे। इसके अलावा रांची विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति के कार्यकाल के दौरान उन पर अपने करीबी व्यक्ति को खूंटी स्थित एक कॉलेज से फर्नीचर आपूर्ति का काम दिलाने का दबाव बनाने के आरोप लगे थे। इन शिकायतों के बाद राज्यपाल सचिवालय के हस्तक्षेप से उन्हें रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति पद से हटाया गया था।

एनपीयू में मौजूदा हालात ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां आंतरिक मतभेदों की मार सीधे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ रही है।