यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस के उप-प्रतिनिधि अर्जन डे वाग्ट के नेतृत्व में टीम ने खूंटी जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का दौरा कर शिक्षा सुधार और बालिका केंद्रित पहलों का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया। यह भ्रमण मुख्य रूप से झारखंड में जारी मातृभाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा तथा किशोरियों के सशक्तिकरण के प्रभाव को समझने पर केंद्रित रहा।
अनिगढ़ा स्थित कस्तूरबा विद्यालय में डे वाग्ट ने देखा कि शुरुआती कक्षाओं में मातृभाषा में पढ़ाई करने से बच्चे पाठ्यक्रम को अधिक सहजता से समझ रहे हैं। रोचक शिक्षण सामग्री और स्थानीय भाषा में संवाद ने बच्चों की भागीदारी बढ़ाई है।
टीम ने शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा अधिकारियों से चर्चा कर जाना कि स्थानीय भाषाओं—मुंडारी, खड़िया, संथाली, कुड़ुख और हो—में पढ़ाई का लाभ बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी सीखने में भी मिल रहा है।
यह बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम, जिसे जेईपीसी, यूनिसेफ और लेंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन ने मिलकर 1000 से अधिक स्कूलों में लागू किया है, आदिवासी बच्चों की शिक्षा यात्रा को नई दिशा दे रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के अनुभवों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जा रहा है ताकि भविष्य में राज्य स्तरीय नीति को मजबूत आधार मिल सके।
डे वाग्ट ने कर्रा स्थित कस्तूरबा विद्यालय में किशोरियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और कौशल विकास गतिविधियों का भी अवलोकन किया। छात्राओं ने विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को मॉडल और प्रयोगों के माध्यम से प्रदर्शित किया—जैसे विद्युत सर्किट बनाना, द्रव्यमान संतुलन करना और प्लास्टिक की बोतलों से टॉर्च तैयार करना।
ये प्रदर्शन दर्शाते हैं कि लड़कियाँ विज्ञान एवं तकनीकी विषयों में अब पूर्वाग्रहों को चुनौती दे रही हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
विद्यालय की छात्राओं ने ‘आधा-फुल सेल्फ-एस्टीम पैकेज’ विषय पर एक नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने यह संदेश दिया कि साहसिक गतिविधियाँ केवल लड़कों तक सीमित नहीं—लड़कियाँ भी समान क्षमता रखती हैं।
छात्राएँ मासिक धर्म स्वच्छता, किशोरावस्था के बदलाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनिनिका मित्रा ने कहा कि मातृभाषा-आधारित शिक्षा और कस्तूरबा विद्यालयों में जीवन-कौशल कार्यक्रम उन बच्चों के लिए आशा की किरण हैं जो सामाजिक या भौगोलिक रूप से हाशिए पर हैं।
इस निरीक्षण के दौरान यूनिसेफ झारखंड टीम के सदस्य—डॉ. कनिनिका मित्रा, पारुल शर्मा, जोशीला पल्लपति, लक्ष्मी सक्सेना समेत कई जिला और राज्य स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।