राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज सरस्वती विद्या मंदिर, रतनपुर, टुंडी में आयोजित प्रांतीय खेलकूद प्रतियोगिता के समापन अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता या पुरस्कार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन मूल्यों का सशक्त माध्यम है।
राज्यपाल ने कहा कि खेलों के माध्यम से बच्चे हार और जीत को सहजता एवं विनम्रता के साथ आत्मसात करना सीखते हैं। साथ ही यह सहयोग, नेतृत्व, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण जैसे गुण विकसित करता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बाल्यावस्था में खेलों के प्रति रुचि विकसित करने को स्वस्थ और आत्मविश्वासी समाज की आधारशिला बताया।
उन्होंने विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली से संबद्ध विद्या विकास समिति, झारखंड की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के संवर्धन हेतु किए जा रहे प्रयास प्रशंसनीय हैं। राज्यपाल ने इस बात पर भी खुशी जताई कि इन संस्थानों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अनेक छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं और अपनी प्रतिभा के दम पर लगातार प्रगति कर रहे हैं।
राज्यपाल ने वनवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संगठन, जो नि:स्वार्थ भाव से शिक्षा का दीप प्रज्वलित करते हैं, केवल स्कूल नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने बताया कि 18 दिसंबर से आयोजित इस प्रांतीय खेलकूद प्रतियोगिता में लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो बच्चों में खेलों के प्रति उत्साह और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ‘खेलो इंडिया’ अभियान और हाल ही में घोषित ‘राष्ट्रीय खेल नीति–2025’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल देश में खेलों को नई दिशा दे रही हैं और भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने में मददगार साबित होंगी।
उन्होंने झारखंड की खेल प्रतिभाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य ने क्रिकेट में महेन्द्र सिंह धौनी, तीरंदाजी में दीपिका कुमारी और पूर्णिमा महतो तथा हॉकी में सलिमा टेटे और निक्की प्रधान जैसी खिलाड़ियों को जन्म दिया है। राज्यपाल ने विशेष रूप से कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान झारखंड की बेटी सलिमा टेटे हैं।
अंत में राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि झारखंड की मिट्टी में संघर्ष, परिश्रम और समर्पण की भावना स्वाभाविक रूप से निहित है। आवश्यकता है कि स्कूल स्तर से ही बच्चों में खेलों के प्रति रुचि बढ़ाई जाए, उन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर प्रदान किए जाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच से निकले अनेक युवा भविष्य में राज्य और देश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।