रबी बुआई खत्म होने के बाद भी धान खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। दो माह बाद भी अभी लक्ष्य का एक तिहाई खरीद ही हुई है। अब बचे समय में लक्ष्य प्राप्त करना सहकारिता विभाग के लिए कठिन चुनौती है।
इस बार राज्य में धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। एक नवंबर से खरीद शुरू है। इस तरह दो माह छह दिन बीतने के बाद भी मंगलवार शाम तक 12.41 लाख मीट्रिक टन धान ही किसानों ने बेचा है। सहकारिता विभाग धान खरीद की रफ्तार बढ़ाने के लिए लगातार निर्देश दे रहा है। विभाग के अधिकारी प्रखंड स्तर पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं
हेल्पलाइन पर भी किसानों की समस्या सुलझाई जा रही हैं। मुख्यालय से भी अधिकारी क्षेत्र में जाकर किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। बावजूद खरीद
राज्य के 32 जिलों से चावल की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। इसके चलते भी धान खरीद में बाधा आ रही है। खाद्य निगम के गोदाम में चावल जमा होने के बाद ही धान का भुगतान शुरू होता है। इसी कारण किसानों को भुगतान में भी विलंब हो रहा है।
मोंथा चक्रवात के असर के चलते इस बार राज्य में धान की कटनी देर से शुरू हुई। नवंबर में बारिश के चलते धान कटने के बाद भी उसमें नमी की मात्रा ज्यादा थी। इस कारण पैक्स और व्यापारमंडल किसानों को नमी का बहाना बनाकर लौटाते रहे। कई जगहों से धान खखरी के कारण भी खरीद से इनकार की शिकायत आई। उसके बाद किसान रबी की बुआई में जुट गए। अब रबी की बुआई खत्म हुई है। इस बीच मिलों ने पोषणयुक्त (एफआरके) चावल के बिना धान कुटाई शुरू नहीं की। इसके चलते भी किसानों को भुगतान करने में देरी हुई है