बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ी घोषणा सामने आई है। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जानकारी दी कि शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण यानी TRE-4 के लिए 15 से 20 जनवरी के बीच रिक्तियों का प्रस्ताव BPSC को भेज दिया जाएगा। यह राज्य के लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो वर्ष 2005 में पूरे बिहार में शिक्षकों की संख्या करीब 2 लाख थी। आज यह संख्या बढ़कर 5 लाख से अधिक हो चुकी है। साल 2005 में जब नीतीश कुमार को बिहार की जनता ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी थी, तब शिक्षा बजट मात्र 4 हजार करोड़ रुपये का था। आज वही बजट बढ़कर 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह साफ दिखाता है कि सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है।
हाल ही में कैबिनेट से 7 निश्चय-3 को भी मंजूरी मिली है, जिसमें शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल और एक डिग्री कॉलेज खोला जाए। इसके साथ ही अनुकंपा के आधार पर 5500 विभिन्न पदों पर बहाली की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी। स्कूलों में ड्रॉपआउट दर घटकर 1 प्रतिशत से भी कम हो जाना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इसके अलावा 5 हजार से अधिक पदों पर लाइब्रेरियन की बहाली का भी रास्ता साफ किया जा रहा है, जिसका रोस्टर क्लीयरेंस जल्द पूरा होगा। शिक्षकों के लिए सुविधाएँ बढ़ाई गई हैं, उनकी पसंद के अनुसार ट्रांसफर की व्यवस्था भी की जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि जब शिक्षकों को इतनी सुविधाएँ मिल रही हैं, तब क्या वे अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभा रहे हैं? अगर शिक्षक रील्स बनाने में ज्यादा व्यस्त रहेंगे, तो फिर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान कौन देगा?