Patna में गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गंगा किनारे 500 एमएलडी क्षमता का नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी बनाया जाएगा, जो राज्य का अब तक का सबसे बड़ा एसटीपी होगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए दीघा से गायघाट तक के सभी छोटे-बड़े नालों को जोड़ा जाएगा। नालों के गंदे पानी के लिए अलग चैनल तैयार किया जाएगा, ताकि बिना ट्रीटमेंट कोई भी पानी सीधे गंगा में न गिरे।
यह नई स्कीम Namami Gange परियोजना में बदलाव के बाद लागू की जा रही है। नगर विकास एवं आवास विभाग और नमामि गंगे प्रशासन के बीच सहमति बन चुकी है। हाल ही में नमामि गंगे के डीजी के पटना दौरे के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया गया। लक्ष्य है कि डेढ़ साल के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए।
राज्य में कुल 39 एसटीपी की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 21 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 13 पर काम जारी है। बाकी परियोजनाओं को मॉनसून 2026 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ओ एंड एम की निगरानी तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है। जियो-टैगिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
कुर्जी और राजापुर नाले की टैपिंग पहले ही की जा चुकी है और उनका पानी दीघा एसटीपी तक पहुंच रहा है, जहां रोजाना 50 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट हो रहा है। आने वाले समय में यही मॉडल गंगा किनारे बसे अन्य शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लागू किया जाएगा। इससे गंगा की स्वच्छता को नई मजबूती मिलेगी और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो