खगड़िया सांसद राजेश वर्मा की पहल: ‘हमारी बहना’ अभियान में हर साल 52 जरूरतमंद बेटियों की कराएंगे शादी

समाज में बेटियों की शादी को लेकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की चिंता अक्सर सामने आती है. कई घरों में माता-पिता सिर्फ पैसों की कमी के कारण बेटियों के विवाह को लेकर परेशान रहते हैं

खगड़िया सांसद राजेश वर्मा की पहल: ‘हमारी बहना’ अभियान में हर साल 52 जरूरतमंद बेटियों की कराएंगे शादी
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Mar 10, 2026, 2:06:00 PM

समाज में बेटियों की शादी को लेकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की चिंता अक्सर सामने आती है. कई माता-पिता अपनी बेटियों की शादी के लिए सालों तक पैसे जोड़ते रहते हैं, लेकिन फिर भी आर्थिक तंगी उनके लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. कई बार सिर्फ पैसों की कमी के कारण बेटियों की शादी टलती रहती है.

इसी सामाजिक समस्या को ध्यान में रखते हुए खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा ने एक सराहनीय पहल की घोषणा की है. उन्होंने अपने क्षेत्र में ‘हमारी बहना’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया है. इस अभियान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग करना है, ताकि किसी भी बेटी का विवाह सिर्फ आर्थिक अभाव के कारण न रुके.

इस पहल के तहत सांसद हर साल अपने लोकसभा क्षेत्र की 52 जरूरतमंद बेटियों का सम्मानपूर्वक विवाह कराएंगे. खास बात यह है कि इन शादियों में होने वाले सभी जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी वे खुद उठाएंगे. यानी शादी से जुड़ी व्यवस्थाएं, जरूरी सामान और अन्य खर्चों की चिंता परिवारों को नहीं करनी होगी.

सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि उनके लोकसभा क्षेत्र में कई ऐसे परिवार हैं जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है. ऐसे परिवार अक्सर बेटियों की शादी को लेकर लंबे समय तक चिंता में रहते हैं. कई बार पैसे की कमी के कारण शादी टालनी पड़ती है. उन्होंने कहा कि ‘हमारी बहना’ अभियान उन्हीं परिवारों की मदद के लिए शुरू किया जा रहा है.

अपने संबोधन में सांसद भावुक भी नजर आए. उन्होंने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को सिर्फ एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं निभा रहे हैं, बल्कि इसे एक भाई का कर्तव्य मानते हैं. उनके अनुसार, उनके लोकसभा क्षेत्र की हर बेटी उनकी बहन की तरह है. अगर किसी परिवार को अपनी बेटी की शादी को लेकर परेशानी होती है, तो वह चिंता उन्हें भी महसूस होती है.

उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत हर साल 52 बेटियों का सामूहिक विवाह पूरी गरिमा और सम्मान के साथ कराया जाएगा. शादी में लगने वाले सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे, ताकि परिवारों को किसी तरह की परेशानी न हो.

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ शादी कराना नहीं है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी है. उनका मानना है कि जब समाज बेटियों को बराबरी और सम्मान देगा, तभी वास्तविक विकास संभव हो सकेगा.