झारखंड हाईकोर्ट ने रजरप्पा मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई पर सुनवाई करते हुए प्रभावित दुकानदारों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने रामगढ़ जिले के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि जिन व्यापारियों पर कार्रवाई का असर पड़ रहा है, उनके पुनर्वास की व्यवस्था एक महीने के भीतर सुनिश्चित की जाए।
यह मामला तब सामने आया जब मंदिर क्षेत्र के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर प्रशासन ने दुकानदारों को नोटिस जारी कर उनके प्रतिष्ठानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इस कदम से स्थानीय व्यापारियों में असंतोष पैदा हो गया, क्योंकि उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट नहीं थी।
स्थिति से परेशान होकर अरुण कुमार पांडा सहित कई दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि बिना उचित पुनर्वास के उनके व्यवसाय को हटाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है और इससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि पहले प्रभावित लोगों के लिए समुचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक आगे की कोई कठोर कार्रवाई उचित नहीं होगी।
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला स्थानीय व्यापारियों के हितों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।