रांची पुलिस ने अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क की जड़ें झारखंड से लेकर बिहार तक फैली हुई थीं और स्थानीय स्तर पर हथियारों की सप्लाई संगठित तरीके से की जा रही थी।
मामले का खुलासा 13 अप्रैल की रात उस समय हुआ, जब मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र में पुलिस नियमित वाहन जांच कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध स्कॉर्पियो को रोका गया। तलाशी लेने पर वाहन में सवार दो युवकों के पास से पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद हुए। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों ने मांडर निवासी विशाल सिंह का नाम लिया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई।
सूचना के आधार पर पुलिस ने मांडर के करगे गांव में छापेमारी कर विशाल सिंह को गिरफ्तार किया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि वह अपने ही घर को हथियारों के भंडारण और वितरण का केंद्र बनाए हुए था। गांव के बीचों-बीच रहकर वह लंबे समय से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था, जिससे आसपास के लोगों को शक तक नहीं हुआ।
आगे की पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह को हथियारों की आपूर्ति बिहार से की जा रही थी। इस कड़ी में चान्हों निवासी अभिषेक शर्मा का नाम सामने आया, जो पहले से ही आर्म्स एक्ट के एक मामले में आरोपित रह चुका है। पुलिस के अनुसार, अभिषेक बिहार से हथियार लाकर झारखंड में सप्लाई करता था और इस काम में उसका सहयोगी करण गोप भी शामिल था।
पुलिस को जैसे ही इन दोनों के ठिकाने की जानकारी मिली, मांडर के हातमा जंगल में घेराबंदी कर छापेमारी की गई। पुलिस को देखते ही दोनों आरोपी भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से हथियार और गोलियां बरामद की गईं।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने तीन देसी पिस्टल, दस जिंदा कारतूस, चार मैगजीन और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह शुरुआत में छोटे स्तर पर हथियारों की खरीद-फरोख्त करता था, लेकिन समय के साथ इसका नेटवर्क विस्तृत होता गया और कई इलाकों तक फैल गया।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, जिसमें कई अन्य संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द ही और गिरफ्तारियां की जाएंगी।