सुप्रीम कोर्ट से एनोस एक्का को सशर्त राहत, आदिवासी जमीन लौटाने की बाध्यता के साथ मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट से एनोस एक्का को सशर्त राहत, आदिवासी जमीन लौटाने की बाध्यता के साथ मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट से एनोस एक्का को सशर्त राहत, आदिवासी जमीन लौटाने की बाध्यता के साथ मिली जमानत
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Apr 15, 2026, 11:37:00 AM

मधु कोड़ा सरकार में मंत्री रह चुके और कोलेबिरा के पूर्व विधायक एनोस एक्का को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है, लेकिन यह राहत कड़ी शर्तों के साथ आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी रिहाई केवल तभी प्रभावी मानी जाएगी जब वे छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के उल्लंघन से जुड़े मामलों में सुधारात्मक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि एक्का को जेल से बाहर आने के सात दिनों के भीतर उन सभी आदिवासी जमीनों को वापस करने की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग देना होगा, जिनकी खरीद नियमों के विपरीत की गई थी। इसके लिए उन्हें ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक लिखित शपथ पत्र दाखिल करना होगा, जिसमें यह आश्वासन देना होगा कि वे संबंधित संपत्तियों को उनके वैध मालिकों या मूल स्थिति में बहाल करने में पूरी मदद करेंगे।

यह मामला रांची और आसपास के क्षेत्रों में खरीदी गई महंगी जमीनों से जुड़ा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आया है कि ये संपत्तियां सीधे तौर पर एनोस एक्का के नाम पर न होकर उनकी पत्नी, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के नाम दर्ज हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इन सौदों में CNT Act के प्रावधानों की अनदेखी की गई, जो आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण पर रोक लगाता है।

एजेंसियों के मुताबिक, इन जमीनों की मौजूदा बाजार कीमत 57 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। एक्का पहले से ही आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं, जिससे यह प्रकरण और गंभीर हो जाता है।

गौरतलब है कि एनोस एक्का पहले भी अन्य आपराधिक मामलों में घिर चुके हैं। पारा शिक्षक हत्याकांड में सजा के बाद उन्हें अपनी विधायकी गंवानी पड़ी थी। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) उनकी कई संपत्तियों को जब्त कर चुका है। ऐसे परिदृश्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमीन वापसी की शर्त के साथ दी गई जमानत उनके लिए राहत के साथ-साथ एक बड़ा झटका भी मानी जा रही है, क्योंकि जिन संपत्तियों को लेकर वे विवादों में रहे, अब उन्हें उन्हीं संपत्तियों से हाथ धोना पड़ सकता है।