झारखंड में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के महानिरीक्षक साकेत कुमार सिंह ने सक्रिय नक्सलियों को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि जो माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं, उनके लिए राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति पूरी तरह खुली है।
आईजी साकेत कुमार सिंह ने दो टूक कहा कि सरेंडर करने वाले माओवादी किसी भी नजदीकी सुरक्षा बल कैंप में जाकर आत्मसमर्पण कर सकते हैं। आत्मसमर्पण की प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और उन्हें किसी भी तरह की क्षति नहीं पहुंचाई जाएगी। सरकार की नीति के तहत उन्हें आर्थिक सहायता, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ शीर्ष माओवादी नेता युवाओं को बहला-फुसलाकर हिंसा के रास्ते पर ले जा रहे हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि हालिया सुरक्षा अभियानों ने साफ कर दिया है कि माओवाद का भविष्य अंधकारमय है और इसका अंत केवल तबाही में ही होता है।
आईजी के मुताबिक, फिलहाल झारखंड में माओवादियों की संख्या काफी सीमित रह गई है। राज्य में लगभग 65 माओवादी अभी सक्रिय हैं। इनमें सबसे अधिक पश्चिमी सिंहभूम जिले में 48 माओवादी बताए गए हैं। इसके अलावा पलामू में 3, चतरा में 4, हजारीबाग में 2 और लातेहार जिले में 4 माओवादी सक्रिय हैं।
सीआरपीएफ ने एक बार फिर दोहराया है कि हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही माओवादियों के लिए सुरक्षित और बेहतर विकल्प है।