मकर संक्रांति के पावन पर्व पर चतरा जिले में ऐतिहासिक बलबल पशु मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले को लेकर प्रशासन और मेला समिति ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। मकर संक्रांति के दिन विधिवत उद्घाटन के साथ ही मेले की शुरुआत होगी, जिसमें हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।
पर्व के दिन सुबह से ही विभिन्न गांवों और दूरस्थ इलाकों से लोग बलबल धाम पहुंचेंगे। श्रद्धालु यहां स्थित पवित्र गर्म जल कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना करेंगे। बलबल मेला धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ पशु व्यापार और ग्रामीण जीवनशैली का भी बड़ा मंच माना जाता है।
इस मेले में झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से पशु व्यापारी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। मेले में गाय, बैल, भैंस, बकरी समेत अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री होती है, जिससे किसानों और पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
मनोरंजन और लोक संस्कृति की झलक
मेले में आगंतुकों के मनोरंजन के लिए झूले, ब्रेक डांस, ड्रैगन ट्रेन जैसे आधुनिक झूले लगाए गए हैं। इसके अलावा सर्कस, जादू के खेल, मौत का कुआं और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोक गीत और नृत्य मेले की पारंपरिक पहचान को और जीवंत बना रहे हैं।
सुरक्षा, सुविधा और स्वास्थ्य इंतजाम
प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविर भी स्थापित किया है, ताकि किसी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का प्रतीक माने जाने वाला बलबल मेला वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सहेजता आ रहा है। प्रशासन और मेला समिति का विश्वास है कि इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक और यादगार बनेगा तथा ग्रामीण जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।